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नई दिल्ली : बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर पटना में आयोजित शती शताब्दी सम्मान समारोह में भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों से आमंत्रित 100 साहित्यकारों, लेखकों, कवि़यों व रचनाकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद व बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष व डॉ. अनिल सुलभ द्वारा उत्तराखण्ड के साहित्यकार कालिका प्रसाद सेमवाल, डॉ. सत्या नंद बडोनी व नीरज नैथानी सहित त्रिपुरा, असम, अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, केरल, पाण्डिचेरी, तमिलनाडु आदि राज्यों के साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।bihar-hindi-sammelan

इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा और संरक्षण में वर्ष 1919 में स्थापित बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का इतिहास गौरवशाली रहा है। यह संस्था तभी से देशभर में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार में अपना सराहनीय योगदान देती रही है। अपने सौ वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित शताब्दी समारोह में आज संस्था ने भारतवर्ष के सभी प्रांतों के हिंदी भाषा के विद्वानों को सम्मानित कर इतिहास रचा है।

शताब्दी समारोह में सम्मानित साहित्यकार नीरज नैथानी ने कहा कि बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के इस गरिमापूर्ण समारोह में प्रतिभाग करना अपने आप में गौरव की बात है। इसके साथ ही सम्मान समारोह में हरियाणा राज्य के राज्यपाल महामहिम सत्य देव नारायण आर्य, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद व बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष व डॉ. अनिल सुलभ के संयुक्त करकमलों से साहित्यकार सम्मान प्राप्त करना उनके लिए अविस्मरणीय है। सांयकालीन सत्र में देर रात्रि तक चले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने का अवसर भी सुखानुभुति प्रदान करने वाला था। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के गरिमामयी प्रशाल में हिंदी साहित्य के नामचीन पुरोद्धाओं डा० राजेंद्र प्रसाद, रामधारी सिंह दिनकर, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, रामवृक्ष बेनीपुरी, पुरुषोत्तम दास टंडन, महादेवी वर्मा, बाबा नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, आचार्य शिव पूजन सहाय आदि के तेजोमयी आलोक चित्रों की सुखद छांव में संचालित इस विशुद्ध साहित्यक कार्यक्रम का अनुभव सदा स्मरणीय रहेगा।

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