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नई दिल्ली : गढवाली, कुमाउंनी एवम जौनसारी भाषा अकादमी संचालन समिति की बैठक शनिवार को अकादमी के उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा की अध्यक्षता व सचिव डॉ. जीतराम भट्ट के संयोजन में संपन्न हुई। इस अवसर पर अकादमी उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा ने संचालन समिति के सदस्यों को अकादमी के प्रति निष्ठा भाव से कार्य करने की शपथ दिलाई। बैठक में भाषा अकादमी के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में कई निर्णय लिये गये। जिनमे मुख्य रूप से आगामी 21 व 22 दिसम्बर को कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में दो दिवसीय लोक पर्व करने का निर्णय लिया।

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लोक पर्व कार्यक्रम दोपहर दो बजे शुरू होगा। जिसमें उत्तराखंड की लोक-संस्कृति के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होंगे। लोक पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह रहेगी जिसमें दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड के आम नागरिकों व कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे। इस अवसर पर अकादमी उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा ने दिल्ली की उत्तराखंडी जनता से आवहान किया कि सभी लोग सक्रिय रुप से लोक उत्सव में अपनी भागदारी करें। लोक उत्सव, नव गठित भाषा अकादमी का उद्घाटन सत्र भी होगा। इसके साथ जनवरी 2020 में दिल्ली में उतैरणी/मकरैणी महोत्सव का आयोजन गढवाली, कुमाउंनी एवं जौनसारी भाषा अकादमी के नेतृत्व में कराये जाने का निर्णय भी लिया गया। जिसके के लिए नीति-नियम तय किये गये। बैठक में लोक उत्सव व उतैरणी/मकरैणी के आयोजन के लिए अकादमी के उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा की अध्यक्षता में दो कमेटियां भी गठित की गयी।

बैठक का संचालन अकादमी के सचिव डा. जीतराम भट्ट ने किया। बैठक में संचालन समिति के सदस्य हीरा सिंह राणा, बृजमोहन उप्रेती, पवन कुमार मैठाणी, सूरत सिंह रावत, वासवानंद ढौंडियाल, जय सिंह राणा, दिवाकर उनियाल, एडवोकेट संदीप शर्मा,  पृथ्वी सिंह , प्रीति कोटनाला सालियान, चंद्रकांता नेगी, पदम सिंह पंवार, राजेश्वर प्रसाद शर्मा, पी.एन. शर्मा, दिनेश सिंह बिष्ट ने भाग लिया।

2 COMMENTS

  1. इस उत्सव का सही मायने में उत्तराखंडी अकादमी का उत्सव तब माना जाएगा जब इस उत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिल्ली में रहे उन कलाकारों को मंच पर आने का अवसर दिया जाएगा जो पिछले कई साल से दिल्ली में रहकर उत्तराखंड की कला और संस्कृति का प्रचार प्रसार करते हुए प्रवासियों में लोक कला और संस्कृति के प्रति प्रेम को जीवित रख रहे हैं अगर इस आयोजन में भी देहरादून रहने वाले और बाहरी कलाकारों को मंच दिया गया और स्थानीय कलाकारों को सम्मानित करने के नाम पर या दर्शकों की भांति बुलाया गया तो ऐसे आयोजनों को एक छलावा मात्र ही कहेंगे!

    • ध्यानी जी, आपने सही कहा हम आपकी बातों का समर्थन करते है आपकी बातों में 100% पर्सेंट सच्चाई है
      जब जब भी कोई भी कार्यक्रम होता है तो दिल्ली में रह रहे उत्तराखंडी, कुमाउनी और जौन्सारी कलाकारों को पहले मौका देना चाहिये और उसके बाद अन्य स्टेटस से लेना चाहिये अगर यहां भी राजनीति घुस जायेगी तो इस ऍकैडेमी का कोई मान्य नही रह जाएगा
      धन्यवाद

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